गोविन्द गौड की गज़लें

ज्ञानसिंधु गोविन्द गौड की गज़लें हो रहा है क्या गज़ब इधर ये जंग की तरह बह रहा है यहां लहू भी क्यों रंग की तरह हाय क्यों मचा हुआ है शोर मार-काट का कुछ न कुछ पिये हुये हैं लोग भंग की तरह बीच शहर आज उसका बुत खडा हुआ मिला लाश जिसकी कल मिली थी एक नंग की तरह किस कदर बा... [पूरी पोस्ट]
writer भगीरथ
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[21 Jan 2009 05:49 AM]

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