अपने दिल की कहिए...
बसंत की दस्तक ने एक बार फिर से तन, मन और उपवन में आग लगा दी है। वसुन्धरा के श्रृंगार ने मन में अलसाए प्रेम को फिर से चैतन्य कर दिया है। मै भी छलांग लगाने को तैयार हूँ। 'खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार, जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार। मेरे इ...
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आशेन्द्र सिंह
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[21 Jan 2009 04:19 AM]



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