भेज़ा फ्राइ

TAPASHWANI पंसारी के दूकान मे,पनवारी के पान मे, मोची के जूते मे, गाय के खूटे मे, महीने के राशन मे, नेता के भाषण मे, पंडित के झोली मे, बोली ठिठोली मे, फिल्म की कहानी मे, रात मच्छरदानी मे, झूठे अस्वासन मे,अपनो के शासन मे, परीक्षा के प्रश्नो मे, साधू के वचनो मे, द... [पूरी पोस्ट]
writer Tapashwani Anand

भेज़ा फ्राइ

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[21 Jan 2009 02:18 AM]

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