मन झाँक ज़रा मन के कोने...

Jyotsna Pandey मन झाँक ज़रा मन के कोने, कुछ पाकर, लगा बहुत खोने. मन के भीतर था प्रेम भरा एक बूँद ईर्ष्या क्यों डाली? ईर्ष्या का कालापन धोने को दिन देखो अभी लगें कितने? मन झाँक ज़रा..... निश्छल हो कर करता था कार्य एक स्वार्थ संग तू क्यों लाया? स्वारथ से तेरे देख ज़र... [पूरी पोस्ट]
writer Jyotsna Pandey
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[20 Jan 2009 13:04 PM]

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