प्रेम पत्रों का प्रेमपूर्ण काव्यानुवाद 6
इस छ्लना में पड़ी रहूं यदि तेरा कहना एक छलावा. तेरे शब्द मूर्त हों नाचें मैं उस थिरकन में खो जाऊं तेरी कविता की थपकी से मेरे प्रियतम मैं सो जाऊं अधर हिलें मैं प्राण वार दूं यदि उनका हिलना एक छलावा. प्रिय तेरे इस भाव-जलधि में मैं डूबी, बस डूबी जाऊं तेर...
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हिमांशु
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[19 Jan 2009 20:09 PM]



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