ज्ञायक ही कारण परमात्मा है

कुन्दकुन्द कहान विकारीपन (विकारत्व) तो आत्मा में नहीं किंतु अल्पज्ञता भी वास्तव में आत्मा में नही ..., पहली ही चोट में सिद्धत्व की स्थापना जो करेगा उसको ही सम्यक दर्शन होता है | आत्मा तो त्रिकाली ध्रुवस्वभाव परम पारनामिक भावः ही आत्मा है . संवर निर्जरा मोक्ष पर्याय... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
views
23
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
4
[19 Jan 2009 10:49 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix