ज्ञायक ही कारण परमात्मा है
विकारीपन (विकारत्व) तो आत्मा में नहीं किंतु अल्पज्ञता भी वास्तव में आत्मा में नही ..., पहली ही चोट में सिद्धत्व की स्थापना जो करेगा उसको ही सम्यक दर्शन होता है | आत्मा तो त्रिकाली ध्रुवस्वभाव परम पारनामिक भावः ही आत्मा है . संवर निर्जरा मोक्ष पर्याय...
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प्रदीप मानोरिया
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[19 Jan 2009 10:49 AM]



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