घिसे हुए जूतों की दास्तान !!
मेरे चमड़े पर कई झुर्रियाँ पड़ गई हैं, कमर भी झुक गई है। मेरे फीते की धज्जियॉं भी उड़ गई हैं। मेरी आत्मा (सॉल) लगभग घिस चुकी है, उसके परखच्चे बस उड़ने ही वाले हैं। अपनी उम्र से ज्यादा मैं जी चुका हूँ। सन् 2004 की होली में मैंने मालिक के पैरों क...
[पूरी पोस्ट]
जितेन्द़ भगत
129
12
0
12
25
[18 Jan 2009 23:00 PM]



Shuffle








