तप
हम कल्पना करते हैं यथार्थ में मनन करते हैं बात करते हैं बहस करते हैं सहमत होते हैं कर्म में परिणत करते हैं अपनी कल्पनाओं को अपने विचारों को अपनी सोच को सृजन होता है एक सुंदर घर का एक सुंदर समाज का एक सुंदर देश का एक सुंदर विश्व का यदि हम ईमानदार रहे...
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MAVARK
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[18 Jan 2009 20:33 PM]



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