ओस की बूँदें
कणिका ने कहा " मुझे बताओ करना क्या है?"
रजत के तर्कों और उसकी भावनाओं के बीच एक अतार्किक द्वंद्व फ़ोन पर एक घंटे से ज्यादा समय ले चुका था, अस्पताल के आई सी यू वार्ड के बाहर लगी जाली को पकड़े पकडे उंगुलियों में लाल निशाँ पड़ चुके थे और वह अपने हाथ को...
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Kishore Choudhary
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[18 Jan 2009 20:23 PM]



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