नहीं, प्रेम है कार्य नहीं
प्रेमिका ने कहा था-"प्यार करते हो मुझसे?" प्रेमी ने कहा-"प्यार करने की वस्तु नहीं. मैं प्यार ’करता’ नहीं, ’प्यार-पूरा’ बन गया हूं. यहां इसी संवाद का विस्तार है- कहने वाला कह जाता है सुनने वाला सुन लेता है लेकिन कहने और सुनने में कहीं विभेद छिपा होता...
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हिमांशु
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[18 Jan 2009 19:12 PM]



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