किस्सा

सागरनामा खिड़की के पल्ले में सिमटा छोटा सा आकाश आस पास की बिखरी भीड़ का दस्तावेज़ बन चला है क्यूंकि मैं जानता हूँ ................. इन आँखों के फ्रेम में दिखने वाली साली भीड़ नहीं है फकत भीड़ का इक छोटा सा हिस्सा है ! अपनी अभिव्यक्ति के बहाने जिसे संवेदनाओं क... [पूरी पोस्ट]
writer सागर
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[17 Jan 2009 16:01 PM]

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