भगवान् स्वरुप

कुन्दकुन्द कहान सिद्ध भगवान् जानने वाले देखने वाले हैं ऐसे ही तुम भी जानने वाले देखने वाले हो ! पूरे अधूरे का प्रश्न ही कहाँ है ! अपने जानने वाले देखने वाले स्वरुप से खिसक कर जो तुम कर्तात्वा में ही रुक गए हो इसलिए ही सिद्ध भगवान् से अलग हो ! पूज्य गुरुदेव श्री कानज... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
6
[17 Jan 2009 05:02 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix