मेल-मिलाप और परिचित का अपरिचित सा वो ख़्वाब
मेल-मिलाप और परिचित का अपरिचित सा वो ख़्वाब शनिवार की देर रात तक काम करने के बाद मैं रविवार की छुट्टी यानी मस्ती, सोना,
घूमना, जो मन करे वो करने का अहसास लिए दिल में अपने रूम तक आया. अगले दिन की छुट्टी है ही तो क्यों न देर रात को भी टेलीविजन देख ही लि...
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DONGRE तृष्णा
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[16 Jan 2009 15:42 PM]



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