मेल-मिलाप और परिचित का अपरिचित सा वो ख़्वाब

डोंगरे की डायरी मेल-मिलाप और परिचित का अपरिचित सा वो ख़्वाब शनिवार की देर रात तक काम करने के बाद मैं रविवार की छुट्टी यानी मस्ती, सोना, घूमना, जो मन करे वो करने का अहसास लिए दिल में अपने रूम तक आया. अगले दिन की छुट्टी है ही तो क्यों न देर रात को भी टेलीविजन देख ही लि... [पूरी पोस्ट]
writer DONGRE तृष्णा
views
20
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[16 Jan 2009 15:42 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix