फ़िर वही शाम वही गम वही तनहाई है..

मानस के अमोघ शब्द जॊर्ज बुश (छोटे) अब जा रहे है, बडी़ दुख की बात है. वे वैश्विक राजनीति के लालु प्रसाद यादव थे. दादागिरी में वे कही भी मायावती से कम नही पडते थे.उनकी वजह से ही चौधराहट का ग्लोबलाईज़ेशन हुआ. हम सब भारतीय उनके जाने के बाद बडे़ ही मायूस हो जायेंगे , कि फ़िर... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर
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[16 Jan 2009 12:36 PM]

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