जो हम नहीं, हमे वही चाहिए....

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... धूप को छाया और छाया को सूरज जी तेज़ धूप चाहिए, हम जो नहीं, हमे बस वही चाहिए, खुद मे जो है उसे कोई नहीं ढूढँना चाहता, बाहर की हर चीज़, हर बात अपने अन्दर चाहिए, मंज़िल की नज़रें टिकी हैं रास्तों पर, रास्तों को उन पर चलने वाले मुसाफिर चाहियें, जलते सूरज को... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[16 Jan 2009 06:45 AM]

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