जुड़ी थी जमीं के तार

monikashekhar शहरों में न सिर्फ आसमान की रंगीनी एक जैसी थी, बल्कि जमीन पर लोगों का उत्साह भी एक जैसा ही था। चांद, तारा, कंठा बेलन, छड़ीला, अद्घा और मोमबत्ता की डोर थामे बच्चे बूढ़े सब न सिर्फ अपनी पतंगबाजी कौशल को आजमाए थे, बल्कि दूसरे के पतंग की डोर काटने की होड़... [पूरी पोस्ट]
writer monikashekhar
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[16 Jan 2009 04:09 AM]

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