खो गई हैं ख्वाहिशें

शब्द-योग खामोशियां टकराती हैं सूनी आंखों से कहीं तो कोई तिनका आस का नजर आए कहीं तो किसी चेहरे पर दिखे हमदर्दी कहीं तो कोई सैलाब इंकलाब का लाए कहीं तो भिंचें मुट्ठियां, सितम पर कहीं तो कोई गीत अमन का गाए कहीं तो बेबसी के खिलाफ जिंदा हो कौमें कहीं तो कोई लाचारग... [पूरी पोस्ट]
writer अनुज
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[16 Jan 2009 04:07 AM]

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