कैसे जहां में आ गए हम
किलकारियां भी डराती हों हंसी भी बिखेरती हो मायूसी, गर्मजोशी से गायब जैसे गर्माहट, आंसुओं पर भी होता शुबा, प्यार पर शक का आलम, खुदा जाने कैसे जहां में आ गए हम । भावनाएं लगे डराने रिश्ते करें परेशान, दुख करें हंसी पैदा, निश्छलता पर लगा हो पहरा, करुणा क...
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अनुज
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[16 Jan 2009 04:07 AM]



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