बस एक बार....

तपती रेत कुछ ही वक्त गुजरा होगा, जब तुम मेरे सब कुछ थे.. जिसे मैं नहीं दे पाती थी कोई नाम। उस धुरी की तरह... जिसके इर्द-गिर्द, मेरी जिंदगी सा कुछ टंगा था... और मैं कोशिश करती थी, उसे खींच लाने की अपने पास... कई बार.... लेकिन हर बार नाकाम। शायद तुमने भांप लिया... [पूरी पोस्ट]
writer तरूश्री शर्मा
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[16 Jan 2009 02:05 AM]

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