मैं ही परमात्मा हूँ
सब परिणमन श्रेणीबद्ध है , इसलिए तुम तो मात्र जानने वाले हो पूर्ण जाननहार इसमें विकार और अपूर्णता क्या ? ! एक रूप परिपूर्ण ही हो ! ........ परिपूर्ण परमात्मा हो !!!!! मैं ही परमात्मा हूँ ऐसा स्वीकार कर ! राग की क्रिया करने वाले क्या वो तुम हो ? अज्ञान...
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प्रदीप मानोरिया
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[15 Jan 2009 23:38 PM]



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