जीवन रीत गया...!
अतीत से कटा नहीं वर्तमान के गुंथे आते में अटा जीवन रीत गया !! कितने टुकड़े जिया पल पल , क्षण क्षण याद नहीं - - गिनती आती नहीं - या की जाती नहीं । किससे कितना जुड़ा कितना कटा जीवन रीत गया !! कितने पैर होंगे सोच के कबूतर के कितने संभाल कर रखे हैं ख़ुद ही...
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सागर
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[15 Jan 2009 16:05 PM]



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