महिलाओं की सच्ची की जय हो!

आज़ाद लब यह न समझिए कि महिलाओं की कोई जय-पराजय झूठ-मूठ हो सकती है. इससे ज्यादा अहंवादी पुरुषों के परनाले आज भी खुले हुए हैं. अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं. तथाकथित 'नारी आन्दोलन' एक अलग तरह की व्यवस्था है. लोग इसे माने या न माने लेकिन एक अद्भुत प्यार मोहल्‍ला म... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[15 Jan 2009 15:40 PM]

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