अधूरा मकान

sandhya gupta उस रास्ते से गुज़रते हुए अक्सर दिखाई दे जाता था वर्षों से अधूरा बना पड़ा वह मकान वह अधूरा था और बिरादरी से अलग कर दिये आदमी की तरह दिखता था उस पर छत नहीं डाली गयी थी कई बरसातों के ज़ख़्म उस पर दिखते थे वह हारे हुए जुआड़ी की तरह खड़ा था उसमें एक टूटे हुए आद... [पूरी पोस्ट]
writer sandhyagupta
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[15 Jan 2009 12:00 PM]

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