रात के जैसी काली चादर ...

NirjharNeer रात के जैसी काली चादर ओढ़ मेरा दिन आता है । तेरे दर पे दस्तक देने ख़ुद चलकर सूरज आता है ॥ देख के मेरे घर का रस्ता जुग्नू भी छुप जाता है । आसमान का हर तारा घर झांक के तेरे आता है ॥ काला बादल साथ हवा के देख मुझे उड़ जाता है । देख के बिखरी जुल्फें तेरी झ... [पूरी पोस्ट]
writer NirjharNeer
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[15 Jan 2009 06:18 AM]

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