तैनूं काफर काफर आखदे, तूं आहो आहो आख
पिछले कुछेक दिनों से थोड़े तनाव में थी, छुट्टियों से लौटकर आई तो लगा कि कहीं एक हवा सी बन रही है जो ठीक नहीं है। ऐसी बातें की जा रहीं थी जो सही नहीं थी। ये थोड़ा अजीब सा था, जब कहीं कुछ बोल रहे होते हैं और आप जानते हैं ये झूठ है। शाम को जब ये तनाव चे...
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neelima sukhija arora
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[15 Jan 2009 05:06 AM]



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