समंदर से कर दुश्मनी........

TAPASHWANI समंदर से कर दुश्मनी, मैं किनारों पर सपने सुखाता रहा | हर लहर यूँ तो दुश्मन घरौंदो की थी, वो मिटाती रही मैं बनाता रहा | खिचता था लकीरे किनारों पर मैं, पर साहिल पर मुझको भरोशा ना था | ख्वाब अपने भिंगो करके अश्को से मैं, कल के गाल मे ही चुपाता रहा | जब... [पूरी पोस्ट]
writer Tapashwani Anand
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[15 Jan 2009 01:18 AM]

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