कविता लम्बी है, पर क्या करुँ कहानी है 2

नया प्रयत्न तुम पर तो होकर न्यौछावर हम सब कुछ थे वार गये पर सत्य कहो, क्यों इस समाज के लघु चिंतन से हार गये यह समाज तो कहने को केवल अपनों का मेला होता सत्य कहूं तो इस समाज में हर एक व्यक्ति अकेला होता पर एक अनोखी बात! प्रीति की रीति जिसे भी आ जाती है और जिसे यह... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु
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[14 Jan 2009 19:52 PM]

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