स्वभाव का लक्ष्य ही आदरणीय है
आत्म स्वभाव के लक्ष्य वाला जीवन ही आदरणीय है , इसके सिवाय दूसरा जीवन आदरणीय गिनने में आया नहीं | विकल्प में स्वयं का अस्तित्व मानने से और महातम्य भाव से ही मिथ्यात्व है | पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी...
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प्रदीप मानोरिया
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[14 Jan 2009 19:38 PM]



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