बड़ी धूप चमकी आँगन में इस गर्मी के मौसम में!
यूँ तो लफ्जों-ख़ास से तेरी ग़ज़ल महकी रही, आई समझ जितनी मुझे, तेरी बातें अच्छी लगीं, कुछ कशिश भी दिख रही थी खयाली जज़्बात में , पर हकीकत से तेरी , वो मुलाकातें अच्छी लगीं , जब ज़िन्दगी की बेबसी पे तिश्नगी का वार हो, तिस पे उनके बद दुआ की सौगातें अच्छी ल...
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kavitaprayas
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[14 Jan 2009 14:47 PM]



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