तू अपनी पिटारी में ,मेरी लाख दुआएं रख ले

अमृता प्रीतम की याद में..... अमृता के ख़त हो या उसकी नज्म ..पढ़ते जाओ तो एक इबादत बनती जाती है ..इस किताब खिड़कियों में जैसे जैसे मैं अमृता के खतों को पढ़ती गई ..वैसे वैसे ख़ुद को एक बच्ची समझती गई जैसे अमृता ने यह ख़त मुझे लिखे हों ...:) हर ख़त अपने में एक कहानी कहता है और नई ब... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[13 Jan 2009 05:34 AM]

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