कभी-कभी खुद को पत्रकार मानने में शर्म आती है !

रमता जोगी बहता पानी.... आज भी याद है वह सुबह जब एक ख्यात अखबार में उनके जर्नलिज्म स्कूल के खुलने की बात लिखी थी...पापा को बताया कि पत्रकारिता जैसा कुछ करना चाहती हूँ। यह बात सुनते ही माँ नाराज हो गईं। उनका मानना था कि पत्रकार केवल थैला लटकाकर यहाँ से वहाँ घूमते रहते हैं...फ... [पूरी पोस्ट]
writer श्रुति अग्रवाल
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[12 Jan 2009 01:27 AM]

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