‘’डॉन्‍ट बी संतुष्‍ट, थोड़ा और वि‍श करो’’

अरे बिरादर !! चीजें हासि‍ल होने के बाद धीरे-धीरे उसका सम्‍मोहन टूटने लगता है, दुनि‍या जि‍स तेजी से बदल रही है, स्‍वाद और जरू‍रतें जि‍स तेजी से बदल रही है, उसकी गति‍ का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। 1984-85 में हॉस्‍टल के प्रार्चाय के पास टी.वी रि‍मोट देखा था जो दस मी... [पूरी पोस्ट]
writer जितेन्द़ भगत
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[11 Jan 2009 23:00 PM]

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