कुछ बंदीसे
दिल के हर अहसास को, हम काश कह पाते | उमड़े हुए हर भाव को, कागज पर लिख पाते || बहुत कुछ दिल मे है मेरे, जो ऐसे कह नही सकता | बड़ी मुस्किल है बिन बोले भी, मैं अब रह नही सकता || मगर कुछ बंदीसे ऐसी है, जो मुझे भी रोकती है | अगर अपनी पर आजाए, तो सरहद चीज़...
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Tapashwani Anand
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[11 Jan 2009 13:37 PM]



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