मैं कड़ुआ हो गया हूँ .. [आलेख] शिवेंद्र मिश्र

तृषा'कान्त' हाय रे..! हिंदू समाज तेरे धर्मनेता समाज को आनंद का रास्ता दिखाते दिखाते स्वयं के लिए सुखो का अंबार लगा लेते हैं और निरीह जनता को दुखों के सागर में डूबकर मरने के लिए छोड़ देते हैं. आनंद और ईश्वर , की बात कहते कहते... और बस …! मेरा मन कसैला होने लगता ह... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
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[11 Jan 2009 04:47 AM]

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