एक नया मतला और दो शेर पेश कर रहा हूँ......
मुफलिसों पर हंसें किसलिए उनपे ताने कसें किसलिए सांप तक ये लगे सोचने आदमी को डसें किसलिए तुमको मालूम है, प्यार में उसने काटी नसें किसलिए कवि दीपक गुप्ता 9811153282 - 9311153282 Delhi NCR , India http://www.kavideepakgupta.com/...
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kavideepakgupta
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[11 Jan 2009 00:17 AM]



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