बूढी आशा

HINDI KAVYA MANCH आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है || सर्द रात तन रहे ठिठुरता , यह दरिद्र संजोग है |हाथ में चिंदी असमंजस है , क्या इसका उपयोग है ||चेहरे पर झुर्री का जाला , निर्धनता का नूर है .......आशाओं से... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
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[10 Jan 2009 23:35 PM]

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