बूढी आशा
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है ||
सर्द रात तन रहे ठिठुरता , यह दरिद्र संजोग है |हाथ में चिंदी असमंजस है , क्या इसका उपयोग है ||चेहरे पर झुर्री का जाला , निर्धनता का नूर है .......आशाओं से...
[पूरी पोस्ट]
प्रदीप मानोरिया
17
0
0
0
10
[10 Jan 2009 23:35 PM]



Shuffle








