शब्दों से कहीं बेहतर और कुछ ज़्यादा ही कहते हैं चित्र
पहले भी कहीं लिखा था कि इन्दौर में जनसत्ता एक दिन बाद मिलता है. उसके बाद भी उसका समाचार संकलन,ले-आउट और भाषा संस्कार मन को लुभाता है. मेरा शहर तो बाक़ायदा अख़बारों की मण्डी बन चला है और तमाम कौतुक रचते अख़बार रोज़ सुबह निगाहों के सामने होते हैं.कुछ बाक़ाय...
[पूरी पोस्ट]
sanjay patel
36
5
0
5
11
[10 Jan 2009 21:46 PM]



Shuffle








