सर्वत्र तुम
मैंने चंद्र को देखा उसकी समस्त किरणों में तुम ही दिखाई पड़े मैंने नदी को देखा उसकी धारा में तुम्हारी ही छवि प्रवाहित हो रही थी मैंने फूल देखा फूल की हर पंखुड़ी पर तुम्हारा ही चेहरा नजर आया मैंने वृक्ष देखा उसकी छाया में मुझे तुम्हारी प्रेम-छाया दिखाई प...
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हिमांशु
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[10 Jan 2009 19:50 PM]



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