.....मैं क्या कहूं
मैंने अपनी पिछली रचना में भारी गलती करी थी, एक मायने में अगर वो गलती नही करता तो इतनी जल्दी गुरु जी से बात करने का सौभाग्य नही मिल पाता। उसी की हुई गलती को सुधारने की कोशिश करने की मैंने कोशिश की मगर वो हो ना सका और एक नई ग़ज़ल बनी। मगर इस ग़ज़ल का एक...
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अंकित "सफ़र"
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[10 Jan 2009 13:38 PM]



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