आंसू-२

सागरनामा उसने जब जब छुआ है चेहरा ख़ुद का कांपती हथेलियों ने पूछा है ॥ तुम सागर तो नहीं हो फिर यह चेहरे पर तुम्हारे रेत सा गीलापन क्यों है ? अब कौन इन सूखी सी अपनी ही लकीरों से उलझती, मात खाती हथेलियों को समझाए "आंसुओं के लिए भी कभी कोई शर्त होती है ???"... [पूरी पोस्ट]
writer सागर
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[10 Jan 2009 06:50 AM]

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