देसी टमाटरों के लदते दिन यानि दुनिया का इकहरा होते जाना

उपस्थित कुछ दिन पहले अपने मित्र रवींद्र के साथ फार्म पर जाने का प्रोग्राम बना। जोधपुर से फासला कोई १३५किलो मीटर का था। गाड़ी में यहाँ से निकलते ही नज़र एक ढाबे के नाम पट्ट पर अटक गयी लिखा था 'शेरे पंजाब वैष्णव भोजनालय '। एक मुस्कराहट के साथ मन तुंरत राज़ी था,... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[10 Jan 2009 04:02 AM]

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