तुम हँस पड़ते हो...

नया प्रयत्न मैं अकेला खड़ा हूँ और तुम्हारे आँसुओं की धाराएँ घेर रही हैं मुझे , कुछ ही क्षणों में यह पास आ गयी हैं एकदम , शून्य हो गया है मेरा अस्तित्व बचने की कोई आशा ही नहीं रही, मैं हो जाता हूँ निश्चल, फ़िर धाराएँ जिधर चाहती हैं बहा ले जाती हैं मेरे जैसा अधीर, ग... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु
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[09 Jan 2009 19:09 PM]

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