टूटे यूं संबंध सत्य से

कुछ ग़ज़ल कुछ गीत ! टूटे यूं संबंध सत्य से सभी झूठ स्वीकार हो गये। ठोकर खाते-खाते आख़िर हम भी दुनियादार हो गये॥ बचपन से सुनते आये थे सच को आंच नहीं आती है। पर अब देखा-सच बोलें तो, दुनिया दुश्मन हो जाती है॥ सत्यम वद, धर्मम चर के उपदेश सभी बेकार हो गये। ठोकर खाते-खाते………….... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Amar Jyoti
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[09 Jan 2009 12:09 PM]

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