हम ने यह माना, कि दिल्ली में रहें खाएंगे क्या

आज़ाद लब उर्दू में व्यंग्य का उद्गम तलाशने की सलाहियत मुझमें नहीं है. लेकिन शायरी में व्यंग्य की छटा मीर, ज़ौक, ग़ालिब, सौदा, मोमिन जैसे पुरानी पीढ़ी के शायरों ने जगह-जगह बिखेरी है. मुझे ग़ालिब की एक पूरी की पूरी ग़ज़ल ध्यान में आती है जिसका हर शेर करुणा, आत्मदया... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
views
76
upvote
11
downvote
0
rating
11
comments
3
[09 Jan 2009 10:55 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix