हर काश पर खत्म होता एक आकाश !
वो हवा के घोडे पर बैठा जीवन के असीम आकश में सरपट भाग रहा हैं, कितनी बार चाहा की उसे रोक लू ,जैसे अल्लाउद्दीन के चिराग में जिन्न बंद रहता हैं ,वैसे ही किसी चिराग में उसे भी बंद कर लू ,वो मेरी मुठ्ठी में हो , मेरे बस में । पर वो किसी के रोकने से रुका ह...
[पूरी पोस्ट]
राधिका बुधकर
62
10
0
10
15
[09 Jan 2009 05:19 AM]



Shuffle








