वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी
अपडेटेड वर्जन), एक अंतिम पैराग्राफ (शायद ये अंतिम ही होगा किसी और पेपर में अभी मिला तो उसके साथ फिर पोस्ट कर रहा हूँ।
जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई...
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Tarun
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[08 Jan 2009 09:10 AM]



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