LOVE STORY # 470: जवानी की अंगड़ाई और बुढ़ापे की जम्हाई के बीच उन लड़कों की यादें थीं

अखाड़े का उदास मुगदर दिल्ली में कुहरे के कई दिनों के बाद धूप निकली थी. वे तीनों एक ही साथ पढ़ती थी और एक ही दफ्तर में काम करती थीं. जवानी की अंगड़ाई और बुढ़ापे की जम्हाई के बीच वे तीनों अपनी दफ्तरी कुर्सियां धूप में ले आतीं और दोपहर के खाने के वक्त बैठकर उस वक्त की बातें... [पूरी पोस्ट]
writer आस्तीन का अजगर
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[08 Jan 2009 03:56 AM]

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