जो टूट के भी टूट नहीं पाता है !
जो टूट के भी टूट नहीं पाता है, जो काटो यूँ लगे और ही बढ़ जाता है , जो पूछे कोई शम्मा की रात कैसी थी? परवाना क्यूँ हँसते हुए जल जाता है.... हर बात में एक याद तेरी आती है , हर गीत पर एक तार सा चल जाता है , वो प्यार भरा तार तेरी ही शहर से होगा, सपना बने...
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kavitaprayas
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[08 Jan 2009 02:50 AM]



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