मौसम
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |आयेंगे वो जो पास, मेरे इंतज़ार है |
वो दूर नहीं पास मेरे जान लीजिये |है चश्म में रूख वो हसीं मेरे आज है |मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
जुल्फों के पेंचों खम है भला स्याह क्यूं बडे |दिन में हुई है शाम यहॉं गुल की...
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प्रदीप मानोरिया
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[07 Jan 2009 23:07 PM]



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