वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

निठल्ला चिन्तन जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब [...]... [पूरी पोस्ट]
writer Tarun
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[07 Jan 2009 20:52 PM]

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